आज सुबह से ही मेरा मन बहुत खराब था बार बार वही सब कुछ मेरी आँखो के आगे घूम रहा था.. चाह कर भी मैं उसे नही भूला पा रही थी. मेरे साथ ऐसा कुछ हो जाएगा मैने कभी भी सपने मे नही सोचा था.. कैसे मैं उस सब मे डूब गयी थी.. छ्चीए मुझे तो सोच कर ही अपने आप से नफ़रात सी होने लगी थी.. वो सीन याद करते ही ऐसा लग रहा था की जैसी वो अब भी मेरे सामने खड़ा हुआ हो.. मैने अपने मन से ये सब ख़याल निकल कर घर का काम करने लग गयी पर वो सब तो जैसे मेरे जहाँ मे बुरी तारह से बस गया था..
विकास के जाने के बाद मैं जब नहा कर अपने बदन पर टोलिया लपेट कर बाथरूम से बाहर निकली तो एक अंजाने भैईय ने मुझे घेर लिया. ऐसा लगा जैसे की कोई मुझे देख रहा है. मैं भाग कर बेडरूम में आ गयी और अपने कपड़े पहन ने लगी. ब्रा और पॅंटी पहन कर मुझे अजीब सा ख्याल आया, जा कर छिदाटी हूँ उसे. अगर वो होगा तो देखेगा पर कुछ कर नही पाएगा. बड़ा मज़ा आएगा पर अगले ही पल ख़याल आया तो मैने अपने सर पर हाथ मारा और खुद से ही बोली, वो यहा नही है निशा. क्या बेकार की सोच पाल कर बैठ गयी हू मैं भी.. वो मेरी जिंदगी का एक बुरा सपना था जो बीट गया..
उसके चले जाने से कुछ तो सुकून मिला वरना उसके आसपास होने का अहसास हर पल मुझे बैचाईन कर देता था.. पर ना जाने मुझे क्या हुआ मेरे कदम खुद बी ए खुद उस कमरे की तरफ चल पड़े जहा अभी कुछ दिन पहले तक वो लड़का रहता था.. जब से वो लड़का गया है तब से मैने वो कमरा खोल कर नही देखा है.. उस कमरे के नझडीक आते ही एक अजीब किस्म की सिहरन पूरे सहरीर मे होने लग गयी.. मैने अपने आप पर काबू रख कर जब कमरे के अंदर घुसी तो पूरे बदन मे एक अजीब सा तूफान उठने लग गया.. मेरी आँखो के आगे वो सब कुछ घूमने लग गया जो इस कमरे मे मेरे साथ हुआ था..
मेरे दोनो हाथ सामने न्यू एअर हुई मेज पर टीके हुए थे ओर वो पीछे से मुज़मे धक्के लगाए जा रहा था हर धक्के के साथ मेरे मुँह से निकालने वाली सिसकारिया मुझे सॉफ सुनाई दे रही थी..
ये सब मुझे मेरी आँखो के होता हुआ दिखाई दे रहा था, बड़ी मुश्किल से मैने अपने आप को संभाला.. फिर एक नज़र मैने अपने आप पर डाली ओर सोचा …अच्छा ही है की वो यहा नही है वरना उसकी तो जान निकल जाती आज मुझे ऐसे देख कर…हहहे ये ख़याल आते ही मैं खिलखिला कर हंस पड़ी. मैं वाहा उस कमरे से निकल कर वापस अपने कमरे मे आने ही वाली थी की मेरी नज़र सामने बिस्तर पर रखे तकिये पर पड़ी.. देखने से ऐसा लग रहा था जैसे की कुछ रखा हुआ है.. मैने तकिया हटा कर देखा तो वाहा एक डेरी न्यू एअर हुई थी. ओर एक गोल्ड चैन न्यू एअर हुई थी. ये वही कहीं थी जो उसने मुझे दी थी मंगल सट्रा बता कर ओर मैने उसे लेने से इनकार कर दिया था. मैं वो डेरी ओर चैन ले कर वापस अपने कमरे मे आ गयी..
अपने कमरे मे आ कर मैं बिस्तर पर लेट गयी.. मेरे हाथ मे वो डेरी ओर चैन लगी हुई थी.. थोड़ी देर तक मैने उस चैन, जिस पर न का लॉकेट लगा हुआ था देखती रही.. ओर उसे उठा कर एक तरफ रख दिया..
मेरे दूसरे हाथ मे वो डेरी लगी हुई थी.. पता नही क्या लिखा होगा.. ये डेरी उसकी पर्सनल डेरी थी.. काई बार मैने उसे इस डेरी मे कुछ लिखते हुए देखा था.. क्या उसकी डेरी खोल कर पढ़ना सही होगा..? घर के सभी काम निपटा ही लिए थे.. ओर वैसे भी विकास आज लाते आने वाले थे टीवी पर भी कुछ ऐसा खास प्रोग्राम नही आ रहा था.. डेरी पढ़ कर ही टाइम पास करते है.. यही सोच कर मैने डेरी को खोल कर पढ़ना शुरू कर दिया..
डेरी खोल कर जैसे ही मैने पहला पेज पढ़ना स्टार्ट किया मेरी आँखे फटी की फटी रह गयी.. उस डेरी मे उसने मेरे बड़े मे लिख रखा था..
निशा बहुत खूबसूरात है.. इतनी शुनदर लड़की मैने आज तक नही देखी.. उपरवाले ने बहुत फ़ुर्सत से बनाया है.. मैं तो निशा की सूरात देखते ही उस पर फिदा हो गया था. इतना शुनदर चेहरा हर किसी को नही मिलता. उसकी आँखो की चंचलता उनके मटकने का अंदाज उफ़फ्फ़..
उसके होंठ तो बस.. एक दम गुलाब गुलाबी.. जब दोनो पंखुड़िया खिलती है तो देख कर ऐसा लगा की हर वक्त कामुक रस टपकता रहता है उसके होंटो से.. ख़ुसनसीब है विकास जो की उसे इतने रसीले होन्ट चूसने को मिलते हैं..
ओर निशा के दोनो उरोज.. उनकी तो बात हिनिराली है.. दोनो उरोज हिमालय पर्वत के जैसे तने हुए उसकी च्चती से चिपके हुए है.. जब वो चलती है तो दोनो उरोज उसके चलने से कामुक अंदाज़ में उपर नीचे हिलते हुए हाअयईी.. दिल बैठ जाता है मेरा उन्हे यू हिलते देख कर. दोनो उरजो की मोटाई और गोलाई एक दम गजब है.. उपर वाले ने एक दम अलग ही सांचा तैयार करा होगा उसके उरजो को ढालने के लिए.. जो भी उन्हे देखता होगा उसके मूह में पानी आ जाता होगा.. जैसे मेरे मूह में आ जाता है.. (ओर बाकी सब दोस्तो के भी)
इतनी सब खूबिया होने के बाद भी उसमे जो सबसे ज़्यादा आकर्षक चीज़ थी उसकी गान्ड..निशा की गान्ड के बड़े में क्या लिखूं कुछ समझ नही आ रहा.. कातिल गान्ड है निशा की.. मेरे दिल का कटाल कर दिया निशा की गान्ड ने.. इतनी मस्त गान्ड मैने आज तक नही देखी.. जब वो चलती है तो गान्ड के दोनो गोल गोल तरबूज बहुत कामुक अंदाज में हिलते हैं.. उनका फूला हुआ पं उसके दोनो भागो को ओर भी ज़्यादा आकाशित बनता है.. नपुंशकका लंड भी खड़ा हो कर झटके मराते हुए सलामी देने लग जाए.. मेरा तो निशा की गान्ड के बड़े में सोच कर ही बुरा हाल हो जाता है.. लंड बिठाए नही बैठता.. बार बार खड़ा हो कर उसकी गान्ड को सलामी देना शुरू कर देता है..
मुझे पूरा यकीन है की इस अप्सरा की चुत भी कम कातिल नही होगी.. बल्कि वो तो सबसे ज़्यादा कयामत धाती होगी.. कैसी दिखती होगी निशा की चुत.. झाते होगी उस पर या एक चिकनी होगी.. जैसी भी होगी.. कमाल होगी..
एक बार निशा को जी भर कर छोड़ना चाहता हू.. हर उस तरह से जैसा उसे देख कर मन मे ख़याल आता है.. कभी तो मन कर कराता है की उसे घूड़ी बना कर उसकी चुत मारू कभी गान्ड मारू.. कभी ख़याल आता है उसकी दोनो चिकनी चिकनी टांगे अपने कंधे पर रख कर उसकी चुत मारू.. लेकिन जानता हूँ की ये मुमकिन नही है.. ये मेरे दिल का केवल ख़याल है एक सपना है.. निशा विकास की बीवी है और मेरी भाभी के समान है.. इसलिए उसको छोड़ने का ख्वाब हमेशा ख्वाब ही रहेगा.. पर मुझे ख़ुसी है की ऐसी सुन्दर अप्सरा के साथ मुझे एक ही घर की चत्ट के नीचे रहने का मोका मिला है.. अगर निशा को च्छू नही सकता कम से कम देख तो सकता हू.. मैं उस उपर वाले का शूकर गुजर हू जिसने मुझे इतनी हसीन खूबसूरात अप्सरा को देखने का सोभाग्या दिया..
डाइयरी पढ़ने के बाद मुझे समझ में नही आ रहा था की कैसे रिक्ट करूँ. मेरे बड़े में बहुत गंदी गंदी बाते लिख न्यू एअर थी उसने डाइयरी में.
“इसका मतलब वो हर वक़्त मुझे घूराता रहता था. कितना बेशरम था शुरू से.. तभी उसकी निगाहे मुझे अपने उपर हमेशा महसूस होती रहती थी..
“इसका मतलब वो हर वक़्त मुझे घूराता रहता था. कितना बेशरम था शुरू से.. तभी उसकी निगाहे मुझे अपने उपर हमेशा महसूस होती रहती थी..
अपने बड़े मे इतना गंदा लिखा हुआ पढ़ने के बाद मैं शरम से पानी पानी हो गयी.. विकास ने आज तक कभी मेरे से ऐसे वर्ड उसे नही करे थे.. वो मुझे इसी तरह की भाषा मे बात कराता था पर मुझे विश्वास नही हो रहा की वो मेरे बड़े मे ऐसा अपनी डेरी मे भी लिखेगा.. उस डेरी मे लिखी हुई बाते पढ़ने के बाद उसके आने से लेकर जाने तक की सारी घतना मेरी आँखो के आगे घूमने लग गयी..
ये एक हफ्ते पहले की बात है..उस दिन सनडे का दिन था विकास के ऑफीस का ऑफ था.. हम दोनो ही आराम से बिस्तर मे एक दूसरे की बाहो मे बाहे डाल कर लेते हुए पड़े थे.. तभी दरवाजे की दूरबेल बाजी.. मैं सोच मे प़ड़ गयी की सुबह सुबह कोन आ गया..
सुबह मे विकास काफ़ी रोमॅंटिक अंदाज मे मुझसे बाते कर रहे थे ओर उन बातो के बीच मे कोन कबाब की हड्डी बन कर आ गया.. मैं जल्दी से बिस्तर से उठी ओर ब्रा ओर पेंटी पहन ने लगी.. पर विकास ने मुझे पकड़ लिया ओर मेरे योनि पर किस करने लगे..
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