Thursday, February 18, 2016

तड़पती जवानी भाग २

छोड़िए ना क्या कर रहे है.. कोई दरवाजे पर बेल बजा रहा है.. मैने शरमाते हुए मनीस से कहा..
गूडमॉरिंग बोल रहा हू अपनी जान को.. विकास ने अपने दोनो हाथो से मेरे नितम को कस कर पकड़े हुए एक ओर किस करते हुए कहा..
ये विकास का राज का स्टाइल था वो मेरे बिस्तर से उठने के साथ ही मेरी योनि पर किस करते थे.. ओर फिर मेरे होंठो पर.. पर आज कोई दरवाजे पर था.. मुझे जल्दी पड़ी हुई थी.. विकास ने मेरे नीटाब से हाथ हटा कर मेरी कमर मे डाल कर मुझे अपने उपर झुका लिया ओर अपने होंठो के बीच मे मेरे होंठ दबा कर किस करने लगे जैसे ही किस ख़त्म हुआ मैने जल्दी से अपनी पेंटी पहनी ओर मेक्शय पहन कर दरवाजे पर आ गयी.. तब से अब तक 4-5 बार वो बेल बाज चुकी थी.. मैने अपने बालो को जो बिखरे हुए थे ठीक करते हुए दरवाजा खोला.. सामने एक लड़का खड़ा हुआ कोई 22-23 साल का.. उसके हाथ मे एक बाग लगा हुआ था.. वो मेरी तरफ एक तक घूर के देखे जा रहा था..
उसका बाग देख कर मुझे लगा की वो कोई सेल्स मन है.. मैं उस से कुछ पूछती इस से पहले ही बोल उठा..
नमस्ते भाभी जी.. विकास है..?
मैं उसकी सूरात देखती रही.. उसकी नज़ारे मेरे पूरे जिस्म पर मुझे चुभती हुई महसूस हो रही थी.. कभी वो मेरे चेहरे को तो कभी मेरी च्चती को एक तक घोरे जा रहा था..
माफ़ कीजिए मैने आप को पहचाना नही.. मैने उसकी तरफ हेरनी भारी निगाह से देखते हुए कहा..
मैं अमित.. वो अभी इस से आगे कुछ बोलता उस से पहले ही..
अरे पीनू.. वहत आ सुरपरिज़े.. अरे बाहर क्यू खड़े हो अंदर आओ.. विकास अंदर बेडरूम से बाहर आ गये थे..
उस लड़के ने आगे भाड़ कर विकास के पैर छुए फिर मेरे भी..
अरे निशा ये पीनू है.. अपनी गाँव वाली मौसी है ना उनका लड़का.. आओ बैठो पीनू.. अरे निशा पीनू के लिए चाय नाश्ते का इंतज़ाम करो..
उस लड़के की सूरात ओर उसके मुझे यूँ घूर्ने से पहले ही नफ़रात सी हो गयी थी उस पर विकास ने मुझे उसके लिए चाय नाश्ता बनाने को कहा तो मेरे सीने पे जैसे साँप लॉट गये.. पर फिर यही सोच कर की गाँव से आया है शायद इसे अकल नही होगी की किसी के यहा जाने पर कैसे बिहेव करते है..
मैं वाहा से सीधा किचन मे आ गयी ओर विकास ओर वो लड़का आपस मे बात कर के अपनी यादे ताज़ा करने लगे..
मैं नाश्ता ले कर बाहर आ गयी.. तो वो मुझे देख कर विकास से बोला की विकासआप बहुत किस्मत वाले हो जो आप को भाभी जैसी सुंदर बीवी मिली है.. उसकी निगाहे दोबारा से मुझे मेरे शरीर पर चुभती हुई महसूस होने लगी..
चिंता मत कर तेरे लिए भी ऐसी ही सुंदर बहू लाएगे.. विकास ने मेरी तरफ मुस्कर कहा..
मुझे बड़ा अजीब सा महसूस हो रहा था.. विकास ने मेरे हाथ से नाश्ता ले कर टेबल पर रख दिया ओर अपने बराबर मे ही बैठने को कहा..
मुझे मेक्शय मे इस तरह से किसी अजनबी के आगे बैठने मे बड़ा अजीब सा फील हो रहा था.. पर मैं विकास के साथ ही बैठी रही..
वो लड़का मेरे सामने ही बैठा हुआ था ओर मुझे देख कर मुकुराए जा रहा था.. मैं जब उसे चाय देने के लिए टेबल पर झुकी तो उसकी निगाहे मेरे मेक्शय के अंदर झाँकति हुई लगने लगी.. मैं तुरंत एक हाथ अपने छाती पर लगा कर उसको चाय पकड़ा दी..
तो पीनू कैसे आना हुआ ? विकास ने उस से उसके आने के बड़े मे पूछा..
वो विकासतोड़ा काम था यहा पर बाबू जी ने भेज दिया.. बोले आप यहा रहते ही हो अगर कोई मदद की ज़रूरात हुई तो आप कर दोगे.. पहले सोचा की किसी धरामशाला मे रुक जौ पर फिर सोचा सीधा आप के पास ही चालू.. आप की शादी मे नही आ पाया था.. इसी बहाने भाभी जी से भी मुलाकात हो जाएगी.. यही सोच कर.. वो बात विकास से रहा था पर देखे मेरी तरफ जा रहा था.. उसके देखने मे हवस सॉफ नज़र आ रही थी..
अरे पीनू बहुत भादिया किया.. विकास की बात सुन कर मेरे दिमाग़ मे यही ख़याल आया क्या खाक भादिया किया.. आज सोचा था सनडे है आज अपने लिए शॉपिंग करने जौगी.. पर.. वो मेरी तरफ बराबर घूरे जा रहा था था उसकी मुस्कुराहट एक दम घिनूनी थी.. मैं वाहा से उठ कर बेडरूम मे आ गयी..
विकास ने उसके रहने का इंतज़ाम दूसरे कमरे मे कर दिया..
विकासबहुत तक गया हूँ सफ़र मे नहा कर आराम करना चाहता हू..
अरे बिल्कुल पीनू.. तुम आराम से नहा कर आराम करो..
मैं अपने बेडरूम मे गुस्से एक दम तिलमिलाई हुई लेती थी.. अरे क्या हुआ जानू..? इतनी नाराज़ क्यू हो..? विकास ने मेरे बगल मे आ कर मेरे चेहरे पर हाथ फेराते हुए कहा..
क्या ज़रूरात थी आप को उसे यहा पर रोकने की..हा..?
क्या जानू तुम भी.. अरे वो हमारे गाँव से आया है ओर मौसी का लड़का है.. पता है मैं जब गाँव मे था तो मौसी ने कभी कोई फराक नही किया अपने लड़के ओर मुझमे.. बल्कि अपने से ज़्यादा ही मुझे माना है.. और फिर दो हफ्ते बाद बिल्लू(प्रेम विकास का छ्होटा भाई जिसे गाँव मे सब प्यार से बिल्लू बुलाते है) की शादी है.. सोचो अगर ये गान मे जा कर बताता की हमने इसे यहा रखने से माना कर दिया.. तुम गाँव के लोगो को जानती नही हो वो ज़रा सी बात को दिल पर लगा लेते है.. ओर अगर पापा को पता चलता की उनकी बहू ने दो रोटी ज़्यादा बनाने की वजह से घर आए मेहमान को वापस लौटा दिया.. उनकी नज़र मे जो तुम्हारी इज़्ज़त है.. अगर तुम्हे लगता है मैने उसे रोक कर ग़लत किया तो तुम बोलो मैं उसे अभी यहा से जाने को बोल देता हू..
ठीक है ठीक है अब ज़्यादा इमोटिओनल ब्लॅकमेल करने की ज़रूरात नही है.. विकास ने मुझे गले से लगा लिया.. ओर फिर मेरे होंठो को किस करने लगे.. किस करते हुए ही जब मेरी नज़र दरवाजे की तरफ गयी तो मैं गुस्से ओर शरम से लाल हो गयी.. वो वही दरवाजे पर खड़े हो कर हमे किस करते हुए देख रहा था.. उसके चेहरे की हँसी देख कर मेरा खून खोले जा रहा था.. मैं जल्दी से विकास से अलग हुई ओर अपने कपड़े सही करने लग गयी.. वो वाहा से हट कर वापिस अपने कमरे की तरफ चल दिया.
मेरा पूरा दिमाग़ खराब हो गया था उस देहाती की इस हरकत को देख कर.. मेरी समझ मे नही आ रहा था की इस बड़े मे विकास को कुछ बताउ या नही.. वो जब से यहा पर आया था तब से मुझे उसकी नीयत ठीक नही लग रही थी.. वो जिस तरह से मुझे देखता था मन तो ऐसा कर रहता की अभी इसका खून कर डू.. पर यही सोच कर की गाँव से आया है.. पिता जी क्या सोचेगे ओर फिर 2 हफ्ते बाद बिल्लू की शादी भी है.. मैं खून का घूँट पे कर रह गयी..
मैं विकास से कह कर की मैं बाथरूम मे नहाने जा रही हू.. अलमारी से अपने कपड़े निकल कर बाथरूम मे आ गयी.. बाथरूम के अंदर कदम रखते ही मेरा पूरा दिमाग़ खराब हो गया उस देहाती ने पूरा का पूरा फर्श गीला कर दिया था.. ओर साहबुन भी वही बीच फर्श मे ही छोड़ दिया था.. एक जगह बैठ कर नही नहा सकता था.. चारो तरफ गीला कर दिया ओर साहबुन भी यही छोड़ दिया अगर किसी का पैर प़ड़ जाता ओर वो गिर जाता तो.. मैने वो साहबुन उठा कर वापस साहबुन दानी मे रखते हुए बड़बड़ा रही थी..
नहा कर मैं चुप छाप अपने बेडरूम मे वापस आ गयी ओर शीशे के आगे बैठ कर अपने बाल सही करने लग गयी.. मेरे आते ही विकास बाथरूम के अंदर चले गये. शीशे के आगे बैठने के बाद उसकी हेवानियत भारी हसी बार बार मेरे आँखो के आगे दिखाई देने लगी जब वो मुझे ओर विकास को देख कर मुस्कुरा रहा था..
बाल ठीक करने के बाद दोफर का खाना बनाने के लिए मैं किचन मे आ गयी.. अगर आज ये देहाती नही आता तो मैं विकास के साथ बाहर खाना खाती ओर ढेर सारी शॉपिंग कराती यही ख़याल खाना बनाते हुए मेरे दिमाग़ मे चल रहा था. पर उसके आने की वजह से मुझे गर्मी मे किचन मे खड़े हो कर खाना बनाना प़ड़ रहा था.. दोफर तक मैने सब खाना बना लिया था. ओर विकास से खाना खाने के लिए बोल दिया..
विकास खाना खाने के लिए उस अमित को जगा कर अपने साथ ले आए.. मैं वही ड्रॉयिंग रूम मे बैठी हुई खाने की टेबल पर विकास का इंतजार कर रही थी. वो अपनी उसी गंदी सी हसी के साथ मुस्कुराता हुआ मुझे घूरे जा रहा था..
मुझे खाना सर्व करते हुए वो लगतार देख कर घूरे जा रहा था. उसकी नज़र देख कर सॉफ पता चल रहा था की वो मेरे बड़े मे कुछ ना कुछ ग़लत सोच रहा था.. उसकी नज़रे मेरे पूरे जिस्म पर किसी तलवार की तरह से चल रही थी..
जब मैने दोनो को खाना सर्व कर दिया तो विकास ने आवाज़ लगा कर मुझसे कहा.. अरे निशा आओ तुम भी हमारे साथ ही बैठ कर खाना खा लो.. अभी विकास अपनी बात ख़त्म नही कर पाए थे उस से पहले ही वो अमित बोल उठा हन.. हन.. भाभी जी आप भी साथ मे ही खाना खा लो..
एक तो मेरा मूड पहले से ही खराब था उस पर उसकी गंदी सी हसी.. नही आप खा लो मैं बाद मे खा लूँगी.. मैने विकास से कहा..
पर विकास नही माने ओर ज़बरदस्ती मुझे खाना खाने बैठना पड़ा.. विकास ओर अमित एक साथ मेरे सामने बैठे हुए थे.. वो मुझे अब भी लगातार घूरे जा रहा था. उसकी नज़र कभी मेरे चेहरे पर कभी मेरी च्चती पर होती थी.. वो खाना इस तरह से खा रहा था जैसे की बरसो बाद खाना मिला हो ओर अब कभी उसे खाना नही मिलेगा मैने जल्दी जल्दी अपना खाना ख़त्म किया ओर उठ कर हाथ ढोने चली गयी तभी वो भी मेरे पीछे ही वाहा से उठ कर चला आया.. मैं हाथ धो ही रही थी थी मुझे मेरे नितंब पर किसी ने हाथ फेरा हो ऐसा महसूस हुआ.. मैने पलट कर देखा तो मेरे पीछे वो देहाती खड़ा हुआ था ओर मुझे देख कर अजीब तरह से मुस्कुराए जा रहा था..
भाभी जी आप के हाथो मे तो सच मे जादू है.. खाना तो एक दम बहुत भादिया बनाया है आप ने.. तबीयत हरी हो गयी खाना खा कर.. उसने मुझे देख कर अपना एक हाथ अपने पेंट की ज़िप के उपर फिरने लग गया..
उसे वाहा अपने पीछे देख कर मेरा खून खोल गया.. मैं उसकी तरफ नफ़रात भारी निगाह से देखती हुई वाहा से अपने बेडरूम मे आ गयी.. ज़रा सी भी शरम नही है मेरे सामने ही इस तरह की गंदी हरकत कर रहा है.. मैं उसकी किसी भी बात का जवाब दिए बिना ही वाहा से सीधे अपने बेडरूम मे चली आई..
विकास उसके साथ उसके कमरे मे चले गये ओर मैं अपने बिस्तर पर आकर लेट गयी.. खाना खा कर ओर दोफर का खाना बनाने की वजह से थकान हो रही थी ओर लेतने के बाद कब मेरी आँख लग गयी मुझे पता ही नही चला.. जब मेरी आँख खुली तो शाम हो गयी थी ओर विकास ओर अमित अब अभी बैठ कर बात कर रहे थे ओर ज़ोर ज़ोर से हंस रहे थे..
मैं अपने बेडरूम से निकल कर जब मैं उस कमरे की तरफ गयी तो वो देहाती मुझे देखते ही बोला की अरे वा भाभी जी अभी आप की ही बात चल रही थी.. आइए बैठिए..
विकास ने मुझे देखा तो बोले अरे निशा तुम उठ गयी.. अपनी उसी प्यार भारी मुस्कुराहट के साथ देखते हुए कहा.. मैने भी विकास की तरफ देख कर मुस्कुरा दिया.. पर जब मेरी नज़र उस अमित पर गयी तो मेरा खून खूल उठा उसके चेहरे पर वही घिनूनी मुस्कुराहट कायम थी.. उस पर नज़ा पड़ते ही मेरे चेहरे से सारी हसी गायब हो गयी.. मैं वाहा से वापस किचिन की तरफ हो ली रात के खाने की तैयारी करने के लिए..
किचन मे आकर मैं खाना बनाया ओर विकास को खाने के लिए आवाज़ लगा दी.. थोड़ी ही देर मे हम सबने खाना खा लिया.. उसके देखने ओर घूर्ने का सिलसिला बदस्तूर जारी था.. खाना खा कर मैं जब हाथ सॉफ करने गयी तो वही दोफर वाला एहसास की जैसे किसी ने मेरे नितंब पर हाथ फिराया हो.. अबकी बार मुझे पहले से ज़्यादा अच्छी तरह हाथ अपने नितंब पर महसूस हुआ..

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