Thursday, February 18, 2016

तड़पती जवानी भाग ३

मैने पलट कर देखा तो विकास ओर वो पीनू दोनो ही मेरे पीछे खड़े हुए थे मेरी समझ मे नही आया की किसने हाथ लगाया था.. लेकिन आगे की तरफ वो पीनू ही खड़ा हुआ था मुझे उसकी ही हरकत मालूम प़ड़ रही थी.. मेरे से ये सब ओर बर्दाश्त नही हो रहा था.. मैने मन ही मन फ़ैसला कर लिया था की मैं इस बड़े मे विकास से बात करूगी.. चाहे जो भी हो.. अब मुझे ये लड़का एक पल भी बर्दाश्त नही है..
मैं वाहा से हाथ सॉफ कर के अपने बेडरूम मे आ गयी.. अपने नितंब पर हाथ महसूस करके बहुत गुस्से मे थी.. थोड़ी ही देर मैं विकास भी कमरे मे आ गये थे..
क्या बात है बड़ी परेशन सी दिख रही हो ? विकास ने मेरे चेहरे पर आ रही परेशानियो की लकीरो को देख कर कहा..
ये लड़का यहा से कब जाएगा ? मैने वैसे ही गुस्से भरे हुए अंदाज मे कहा
क्या हुआ जान इतना नाराज़ क्यू हो रही हो ?
मुझे बिल्कुल भी पसंद नही है की मैं किसी ऐरे गैरे के लिए गरमी मे अपना पसीना बाहौ.. मुझे वो लड़का बिल्कुल भी पसंद नही है.. उसकी नज़र ठीक नही है.. जब भी देखती हू मुझे देख कर अजीब तरह से मुस्कुराते रहता है.. मैने सॉफ सॉफ कह दिया विकास से..
अरे निशा ऐसी कोई बात नही है.. वो बचपन से ही ऐसा है.. ओर तुम्हे देख कर मुस्कुराते ही तो है.. तो इसमे बुरा मानने वाली क्या बात है..? कहते हुए विकास मेरे बगल मे आ कर लेट गये ओर मुझे पीछे से अपनी बाहो मे भरने लगे.. मैने गुस्से के मारे अपने आप को उनसे दूर करने लग गयी..
क्या निशा तुम भी अरे दो दिन के लिए आया है यहा पर उसे एग्ज़ॅम देने है एग्ज़ॅम ख़त्म होते ही चला जाएगा ओर पापा ने ही उसे यहा का अड्रेस दे कर भेजा है.. ताकि उसे कोई तकलीफ़ ना हो.. विकास ने मुझे पकड़ कर माई चेहरे को अपने चेहरे की तरफ घुमा कर मेरी आँखो मे आँखे डाल प्यार से कहा..
पक्का दो दिन बाद चला जाएगा ना ? मैने विकास की आँखो मे देखते हुए कहा..
विकास ने अब अपने दोनो हाथ मेरे कंधे से गता कर मेरे नितंब पर फिरना शुरू कर दिया था.. हाँ उसने दो दिन के लिए ही बोला है..
विकास के हाथ अब तेज़ी के साथ मेरे नितंबो पर चलने लग गये थे.. थोड़ी ही देर मे मैं मदहोश होने लग गयी.. विकास का अब एक हाथ मेरे कुर्ते के उपर से ही मेरे उरजो पर चल रहा था.. अपने उरजो पर विकास का हाथ पड़ते ही मैं ओर भी ज़्यादा मदहोश होने लग गयी.. नीचे उनका एक हाथ बारी बारी से मेरे नितंबो के गुंबड़ो को मसल रहा था.. विकास को मेरे दोनो गुंबड़ो के साथ खेलने मे बड़ा मज़ा आता था..
क्या कर रहे हो.. छोड़ो भी.. मैने विकास से मदहोशी भरे अंदाज मे कहा..
कोई भला चुट्टिया ही होगा जो अपनी इतनी हसीन बीवी को यूँ छोड़ दे.. विकास ने मेरे बाए उरोज को छोड़ मेरे डाए उरोज को मसलना शुरू कर दिया..
दरवाजा तो ठीक से बंद कर लिया है.. मैं जानती थी की अब विकास को रोकना मुश्किल है इस ल्लीए मैने दरवाजे के बड़े मे पूछा..
वो तो मैने अंदर आते ही बंद कर लिया था.. अब जल्दी से मुझे इन दोनो को चूमने दो.. उतार दो इस कुर्ते को.. अब इसका हमारे बीच मे क्या काम..
विकास की बात सुन कर मुझे हल्की सी हँसी आ गयी.. मैने सीधे हो कर जब तक अपना कुरा उतरा तब तक विकास ने मेरी सलवार का नाडा खोल दिया ओर उसे हल्का सा नीचे सरका कर अपने पैरो से पूरा नीचे कर दिया.. गर्मी की वजह से मैने अंदर ब्रा ओर पेंटी नही पहनी थी.. वैसे भी घर मे मैं ओर विकास ही रहते है.. मैश के चक्कर मे मेरी ब्रा ओर पेंटी की आदत कम हो गयी थी.. जब कभी हम बाहर जाते थे तभी मैं पहनती थी..
कुर्ते के हट’ते ही विकास ने छ्होटे बच्चे की तरह अपना मुँह मेरे एक उरोज पर जमा दिया.. मैं बिस्तर पर एक दम सीधी लेती हुई थी.. विकास एक हाथ से मेरी दूसरी उरोज दबा रहे थे ओर उनका एक हाथ मेरी योनि मे अंदर बाहर चल रहा था..
विकास के साथ मे पूरी तरह से खूल कर आवाज़ करते हुए सेक्स का मज़ा लेती थी पर घर पर उस गाँव वाले अमित के आजाने से.. मैं खुल कर आवाज़ नही निकल पा रही थी जिस कारण मेरी उत्तेना ओर भी ज़्यादा भड़ती जा रही ही.. ओर इसी उत्तेजना के कारण मैं एक बार झाड़ चुकी थी.. विकास की उंगलिया बराबर मेरी योनि मे अंदर बाहर हो रही थी.. थोड़ी ही देर मे विकास ने मेरी दोनो टाँगो को घुतने से मोड़ कर दोनो टांगे हवा मे कर दी जिस से मेरी योनि खुल कर उनके सामने आ गयी थी.. विकास ने अपना लिंग मेरी योनीी की लकीर पर उपर से नीचे, नीचे से उपर फिरना शुरू कर दिया.. अब मैं अपना आपा पूरी तरह से खो चुकी थी ओर मेरे मुँह से ज़ोर ज़ोर से सिसकारिया निकालने लग गयी थी.. पूरा बदन पसीने मे तार बदर हो गया था..
आआआआआआअहह……. आआअहह… कम ऑन विकास कम ओं… मेरे मुँह से तेज तेज आवाज़ सुन कर विकास ने मेरे मुँह पर हाथ लगा लिया ओर अपने लिंग को योनि के छेद पा टीका कर धीरे धीरे पूरा लिंग अंदर कर दिया.. ओर आगे पीछे होने लगे.. थोड़ी देर यही सिलसिला चलता रहा.. ओर फिर हम दोनो एक साथ खाली हो कर एक दूसरे से चिपक कर नंगे ही सो गये..
रात को करीब 12.30 बजे मेरी आँख खुल गयी.. विकास मेरे बगल मे ही सो रहे थे ओर ज़ोर ज़ोर से करते ले रहे थे.. मुझे बहुत ज़ोर से प्रेशर लगा हुआ था मैने अपने कपड़े पहने ओर बेडरूम से बाहर आ कर दबे पाँव(ताकि वो पीनू का बच्चा ना जाग जाए) से टाय्लेट की तरफ चल कर टाय्लेट मे आ गयी..
जब मैं टाय्लेट से बाहर निकली तो मेरे होश उडद गये.. टाय्लेट के दरवाजे पर वो पीनू का बच्चा खड़ा हुआ था.. उसे वाहा दरवाजे पर खड़ा देख कर मैं बुरी तारह हड़बड़ा गयी..
तूमम्म्म……. तुम यहा क्या कर रहे हो ?? मैने उसको देख कर गुस्से से कहा..
माफ़ करना भाभी जी.. मुझे बहुत ज़ोर से पेशाब लगी हुई थी.. उसने अपना एक हाथ अपने लिंग पर लगा रखा था.. उसने नाडे वाला अंडरवियर पहन रखा था उसके अंडरवियर मे उसका लिंग तन कर टेंट बना रहा था.. उसके चेहरे पर मुस्कुराहट बनी हुई थी ओर उसका एक हाथ बराबर उसके लिंग के उपर चल रहा था..
उसकी इस हरकत से मैं बुरी तरह से तिलमिला गयी ओर नाक-मुँह सिकोड कर वाहा से अपने कमरे के लिए चल दी..
आआहह….आआहह.. कम ओं… कम ओं…. हहे हहे… उसने हंसते हुए कहा ओर टाय्लेट के अंदर घुस गया..
मैने जब पीछे पलट कर देखा तो मुझे टाय्लेट का दरवाजा बंद मिला..
हे भगवान… मेरा मुँह खुला का खुला रहा गया.. मतलब की इसने सब सुन लिया.. मैं शर्म से पानी पानी हो गयी उसकी बात सुन कर.. पर मेरे दिमाग़ मे उसके लिए नफ़रात ओर भाड़ गयी थी.. बेशर्मी तो देखो मेरे सामने ही मेरा मज़ाक उसा रहा है.. मुझे अब इस बड़े मे विकास से बात करनी होगी.. मैने मन ही मन सोचा ओर वापस अपने कमरे मे आ कर विकास के बगल मे लेट गयी..
अगली सुबह मेरी विकास से कोई बात नही हो पाई क्यूकी विकास को सुबह जल्दी ऑफीस जाना था ओर मैं थोड़ा लेट सो कर उठी थी.. इस लिए उठ ते के साथ ही मैं किचन के अंदर चली आई विकास के ऑफीस जाने के लिए खाना तैयार करने के लिए..
अरे पीनू तुम्हे कही आना जाना तो नही है ? विकास ने
जाते हुए उस से पूछा..
नही विकासजी मुझे कही नही जाना आज मैं यही पर रह कर एग्ज़ॅम की तैयारी करूगा.. कल जाना है एग्ज़ॅम देने के लिए..
उसकी बात सुन कर मैं अपने दाँत बीकनच कर रह गयी.. मेरा पूरा खून खूल गया था.. विकास के जाते ही मैं वापस अपने कमरे मे आ गयी ओर कपड़े वगेरह सही करने लग गयी.. सुबह के 10 बाज रहे थे.. हमारे घर मे एक काम वाली आती थी घर का काम करने के लिए.. वो रोज सुबह 10 बजे तक आती थी ओर 11 बजे तक घर की सॉफ सफाई का काम करके चली जाती थी..
काम वाली के जाने के बाद करीब 12 बजे मैने दोफर का खाना बनाने के लिए किचन मे गयी.. उस देहाती की पसंद पूछना मैने ज़रूरी नही समझा.. विकास सुबह ही लंच ले कर चले गये थे इस लिए मुझे उनके लिए खाना बनाने की कोई ज़रूरात नही थी.. दो जानो का खाना बनाना था इसलिए मुझे ज़्यादा टाइम नही लगा खाना बना ने मे.. मेरे दिमाग़ मे यही चल रहा था की इसे जितना कम भाव दिया जाए उतना ही अच्छा है.. वैसे भी मुझे इसकी हरकत ज़रा भी पसंद नही है.. हर समय मुझे ही घूराता रहता है.. ओर रात को तो मुझे चिढ़ा रहा था.. सोच कर ही मेरा पूरा दिमाग़ खराब हो गया था..
खाना बनाने के बाद जब मैं किचन से निकली तो वो मेरे पीछे ही कुछ दूरी पर खड़े हो कर मुझे देख रहा था.. उसे देख कर मेरा खून खूल गया था.. मैं वाहा से पैर पटक कर टाय्लेट के अंदर चली गयी.. गर्मी मे खड़े हो कर खाना बना ने की वजह से मुझे बहुत ज़ोर से प्रेशर आ रहा था.. मेरा पूरा चेहरा पसीने से भीग गया था..
जब मैं टाय्लेट के बाहर आई तो फिर से टाय्लेट के बाहर अपने लिंग पर हाथ फिराते हुए खड़ा था..
उसकी इस हरकत को देख कर मैं बुरी तरह से उस पर झल्ला पड़ी..
ये क्या बदतमीज़ी है ? मैने गुस्से से उसकी तरफ देखते हुए कहा..
क्या हुआ भाभी जी ? क्या बदतमीज़ी कर दी मैने ? उसने अपने लिंग पर हाथ को ओर भी तेज़ी से जैसे वो उसे मरोड़ रहा हो, करना शुरू कर दिया..
उसकी ये बात ओर हरकत देख कर मुझसे बर्दाश्त नही हुआ.. मैं उस से कहने ही वाली की थी की तुम मुझे देख कर तुम अपने लिंग पर हाथ क्यू लगते हो ? पर अगले ही पल मैने खुद पर काबू पाया ओर वाहा पर पैर पटकते हुए वापस अपने कमरे मे आ गयी..
उसकी इस हरकत ओर जवाब को सुन कर मेरा पूरा सर दर्द करने लग गया था समझ मे नही आ रहा था की क्या करू.. विकास को पीयेच करके उसकी इस हरकत के बड़े मे बताउ या नही..
मैं अपने कमरे मे आई ही थी की वो पीछे से आ गया.. मैने दरवाजा बंद नही किया था इस लिए वो सीधा अंदर घुसा चला आया.. जब मेरी नज़र उस पर पढ़ी तो मैं बुरी तरह से हड़बड़ा गयी..
तुउउउम्म्म्म… तुम.. यहा क्या कर रहे हो ? मैं जल्दी से उठ कर बैठ गयी ओर अपने कपड़े सही करने लगी..
वो भाभी भुख लगी थी.. उसका हाथ बराबर उसके लिंग पर चल रहा था.
मेरा मन तो ऐसा किया की खींच कर एक लात उसके लिंग पर मार डू.. पर कर नही सकी.. ठीक है तुम बाहर चलो मैं आती हू..

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